सउदी अरब का समर्थन प्राप्त बहरैनी शासन ने इस बात को स्वीकार किया कि सुरक्षा बलों ने अभी भी 20 महिलाओं को क़ैद कर रखा है जिन्होंने मनामा में आले ख़लीफ़ा शासन के एकाधिपत्य के विरुद्ध प्रदर्शन किया था। प्रेस टीवी की रिपोर्ट के अनुसार बहरैनी शासन की क़ैद में मौजूद ये महिलाएं उन 45 महिला बंदियों में शामिल थीं जिन्हें शनिवार को एक व्यापारिक प्रतिष्ठान में सत्ताधारी शासन के विरुद्ध नारे लगाने के कारण गिरफ़तार किया गया था। बहरैन में यह विरोध प्रदर्शन इस देश में अभी हाल मं संपन्न हुए विवादास्पद उपचुनाव को लेकर हैं कि जिसका बहरैनी सरकार की वेबसाइट के अनुसार 80 प्रतिशत मतदाताओं ने बहिष्कार किया था। एम्नेस्टी इंटरनेश्नल की सोमवार की रिपोर्ट के अनुसार गिरफ़तार की गयी महिलाओं को यातनाएं दी गयीं और उन्हें क़ानूनी क़दम उठाने की अनुमति नहीं दी गयी। इन गिरफ़तार महिलाओं में सात नाबालिग़ भी हैं। एम्नेस्टी इंटरनेश्नल ने गिरफ़्तार की गयी महिलाओं की ओर संकेत करते हुए कहाः इन्हें गिरफ़तारी के आदेश के बिना गिरफ़तार किया गया, वकील की उपस्थिति के बिना इनसे पूछताछ की गयी और कुछ को यातनाएं दी गयीं या उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया। इस बीच बहरैन के सैनिक महान्यायवादी यूसुफ़ फ़्लेलफ़ाल ने सोमवार को बताया कि सैनिक न्यायालय ने 32 और व्यक्तियों को 15 वर्ष के कारावास का दंड दिया है। इन लोगों को इस वर्ष के आरंभ में प्रजातंत्र की मांग को लेकर होने वाले प्रदर्शनों में भाग लेने के कारण यह दंड दिया गया है। ज्ञात रहे बहरैन में दशकों से सत्ता पर क़ब्ज़ा किए हुए आले ख़लीफ़ा शासन के विरुद्ध फ़रवरी के मध्य से जनता शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रही है। बहरैन में सउदी अरब के समर्थन से आले ख़लीफ़ा शासन द्वारा जनता के बर्बरतापूर्ण दमन में बड़ी संख्या मंआ लोग हताहत व सैकड़ों गिरफ़तार हुए हैं। ज्ञात रहे फ़ार्स खाड़ी में अमरीकी नौसेना के पांचवे बेड़े का विशाल अड्डा बहरैन में है।समाचार समाप्त........166
27 सितंबर 2011 - 20:30
समाचार कोड: 268327
सउदी अरब का समर्थन प्राप्त बहरैनी शासन ने इस बात को स्वीकार किया कि सुरक्षा बलों ने अभी भी 20 महिलाओं को क़ैद कर रखा है जिन्होंने मनामा में आले ख़लीफ़ा शासन के एकाधिपत्य के विरुद्ध प्रदर्शन किया था.....